#कोरोना

बीते चंद दिनों में लगभग पूरे विश्व मानचित्र को अपने में समाहित करने की शक्ति के साथ पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाले मनुष्य की नीरस जिदंगी में एकदम से कोहराम मचा कर रख दिया है #कोरोना ने।

२०२० के शुरुआती महीने में लोग अपनी नीरस जिदंगी के साथ आने वाले ११महीनों की तैयारी कर रहे थे तभी किसी की गलतियों से जन्म हुआ कोरोना का।शुरू में लोगो ने इसे हल्के में लिया तो कोरोना बुरा मान गया,और अब कोरोना लोगो को हल्के में लेना शुरु कर दिया है। देखते – देखते ये कब विश्वप्रसिद्ध हो गया खुद इसे भी नहीं पता। कम समय में जादा प्रसिद्धि कैसे पाए ये कोई कोरोना से सीखे। मजे की बात ये है कि पूरे विश्व मानचित्र पे अभी तक अपनी छाप बनाने के वाबजूद इसके जन्म स्थल का पता ठीक से नहीं चला है ,या इसके माता पिता के औपचारिक पुष्टि किसी ने नहीं की। इंटरनेट पे कई देशों को इसका जन्मस्थल प्रमाणित करने की साज़िश दिख रही है पर उनके पास भी कोई सबूत नहीं है जिसे वो दिखा सके और ये साफ हो की वास्तव में कोरोना का जनक कौन है। शायद बॉलीवुड की कहानियों के नाजायज औलाद जिन्हें जन्म के बाद कूड़े में डाल दिया जाता था फिर वो बड़े होकर अपने मा बाप को ढूंढता था, वैसे ही कोरोना भी लोगो से मिल कर पूरे विश्व में अपने मा बाप को खोज रहा है।

मैंने भी कोरोना को समझने की कोशिश की, तो मुझे समझ में ये आया कि ये बिल्कुल नेटवर्क मार्केटिंग के जैसा है। एक से दो फिर दो से चार और जिससे मिले वो कोरोना का ग्राहक बन गया और इसके नेटवर्क को फ़ैलाने में लग गया। कोरोना का वैज्ञानिक नाम #COVID19 है।जिसका मतलब कोई डॉक्टर या वैज्ञानिक ही आपको बता पायेगा मुझे सच में नहीं मालूम इसलिए मै कोई भी अफवाह जैसी जानकारी नहीं देना चाहूंगा।

एक बात मानने वाली है, भागम भाग भरी जिदंगी में जो लोग हमेशा शिकायत करते थे कि मैं परिवार को समय नहीं दे पा रहा हूं कोरोना उनके लिए देवदूत बनकर आया है। लोग जिस तरह से अपने परिवार से कटते जा रहे थे, अत्याधुनिक सुविधाओं पे निर्भर होते जा रहे थे कोरोना ने सभी लोगो को परिवार के साथ पूरा समय बिताने का एक मौका दिया है, और अपनी जिदंगी एक बार फिर से प्राकृतिक तरीके से जीने का मौका दे रहा है । हम जो मार्केटिंग के दौर में बाद एक ग्राहक भर बन कर अपनी जिदंगी जी रहे थे कोरोना उसी मार्केटिंग के दौर में एक ऑफर ले कर आया है। बंपर ऑफर परिवार के साथ प्राकृतिक तरीके से समय बिताओ और अपने परिवार को कोरोना से बचाओ। अब ये लोगों पर निर्भर करता है आप इस ऑफर का कितना लाभ उठाते है। पर सावधान। अगर आपके परिवार मै कोई कोरोना से ग्रसित है तो उसपे अभी के नैनो फैमिली थियोरी का पालन करे और उस सदस्य से अपने आप को अलग करे नहीं तो पारिवारिक मोह में पूरे परिवार का सफाया भी हो सकता है।

#BreakTheChain

कोरोना जितनी आसानी से आपको अपना बनाता है उतनी ही मुश्किल इसको पहचानना भी है। अगर आपको कोरोना ने छुआ है तो आप इसकी पहचान करने के लिए अपनी सांस रोक कर पहचान सकते है। अभी तक लोगों और विद्वानों द्वारा सुनने को यही मिला है कि एक साधारण इंसान अपनी सांस को जहां ३० सेकंड आराम से रोक सकता है वहीं कोरोना ग्रसित व्यक्ति १० से १४ सेकंड उसके बाद उसे सांस रोकने में परेशानी होती है।

कोरोना के लक्षण

अगर आपको पता चले की अपने बचपन में बिछड़े मा बाप को कोरोना ने आप में ढूंढने की कोशिश की है तो सबसे पहले आप अपने आप को अपने स्नेहजनो से अलग करे। फिर अपने डॉक्टर से सीधे ना मिलकर फोन के द्वारा सूचना दे।डॉक्टर को सूचना मिलने के बाद आपके इलाज या बचाव की प्रक्रिया सुविधानुसार शुरू कर दी जाएगी। तब तक अपने आप को किसी के संपर्क में ना आने दे। अन्यथा आप अपने साथ अन्य को भी ले डूबेंगे।

कोरोना कोई प्राकृति आपदा नहीं बल्कि मानव निर्मित आपदा है या हम इसे प्राकृतिक के साथ हुए मानवीय खिलवाड़ का नतीजा भी कह सकते है। कोरोना का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है इसलिए मै यहां कोई आंकड़ा नहीं दूंगा अन्यथा वो थोड़ी देर में बदल जाएगा। अगर आप आंकड़े जानने को उत्सुक है तो आप नीचे दिए बटन से आंकड़े देख सकते है

कोरोना सही मायने में प्राकृतिक बीमारी ना होकर इंसान के अत्याधुनिक सुविधाओं के आदी होने का नतीजा है।

कोरोना से बचाने ना तो आपको सरकार आएगी ना अभी तक इसकी कोई दवा बनाई गई है।अगर अभी तक आप कोरोना से बचे हुए है ओर आगे बचना चाहते है तो अपनी रोजमर्रा के कार्यों में कुछ बदलाव कर बच सकते है।

  • अपने हाथो कि नियमित धोते रहे।
  • अगर जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले।
  • समूह से बचे।
  • मुंह पे हाथ या कोहनी रख कर छिके/खांसे।
  • घर से बाहर,भीड़ में ,समूह में मुंह को मास्क,रुमाल या गमछे से ढक कर निकले।
  • नियमित पानी पिए।
  • नियमित व्यायाम करे।
  • जितनी भूख हो उतना ही भोजन करे।
  • कूड़ा अथवा गंदगी कम फैलाए।
  • सड़क के जानवरो को भी खाना देते रहे ताकि जब आप घर से निकले तो वो आपको काटे ना
  • सड़क पे आपके आसपास कोई गरीब दिखे या फिर कोई सेवाकर्मी दिखे तो उन्हें भी खाना दे। वो इस महामारी के समय में भी अपनी जान की परवाह किए बगैर आपकी सेवा कर रहे है।
  • ना खुद भ्रमित हो ओर ना ही लोगो को भ्रमित करे।कुछ भी जानने के लिए अधिकारिक माध्यमो का ही इस्तेमाल करे । सोशल नेटवर्किंग साइट की अफवाह से बचे।
  • सरकार द्वारा जारी निर्देशों का ईमानदारी से पालन करे।
  • संयम बना कर रखे।प्रशाशन एवम अन्य सेवाकर्मियों का सहयोग करे।
  • सार्वजनिक जगह,खरीददारी करते हुए जाए तो एक दूसरे से लगभग १फिट की दूरी पर खड़े हो
  • ऐसी ही और कोई बात यहां अगर छूट रहा हो तो मुझे ओर लोगो को अवश्य बताएं

जब तक कोरोना का खतरा है आप अपने बच्चों के साथ घर पे खेले । उनपे गुस्सा ना करे।अचानक से घर में रहने से सभी की मानसिक स्थिति को समझे ओर अपने परिवार के साथ घर में जो भी माहौल बन रहा है उसे खुशनुमा बनाए ओर अपने साथ अपने परिवार को भी खूब खुश रखे। आशा है जब कोरोना खत्म हो तो आप इन घर में बिताए दिनों को याद करना चाहे ।

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धूपो नहाओ, कालो बनो!

अभी हाल के दिनों में हम सब ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया । पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूरे दिन सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हर जगह लोगों की तरह तरह की चोंचलेबाजी खूब मात्रा में देखने को मिली। कई सारे जनसाधारण लोग, नेताओं, अभिनेताओं और विशेष संस्थाओं से जुड़े लोगो ने वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम भी समायोजित किये जिसमे उन्होंने कई वृक्ष लगाये , कई सौ तस्वीरे खिची , कई सारीं जगहों पर पोस्ट किया, उन तस्वीरों पर कई सारे लाइक, शेयर एवं कमेंट किये गए। कई लोगो ने कई तरह के संकल्प भी लिए। कुछ लोगो ने सरकार एवं व्यवस्था  पर आरोप –प्रत्यारोप भी लगाये और व्यवस्था को जिम्मेदार भी ठराया दिया।

इन सब के बीच मैंने भी लोगों के कई तस्वीरों को देखा , कई लेखो को पढ़ा, कई सारे उनके बनाये विडियो भी देखे लेकिन मुझे कही भी उसमे लोगो में पर्यावरण की जिम्मेदारी खुद लेने की भावना नहीं दिखी।

क्यों दिखेगी, आखिर पर्यावरण ने हमे दिया क्या है?

सब कुछ हमे अपने परिवार से मिलता है, हम मेहनत करते है, फिर खुद से अर्जन करना  सीखते है, कुछ मामलों में समाज प्रशासन  और सरकार हमारी मदद  करती है। तो इनसब में पर्यावरण कहाँ  है ।। कही नहीं।।

हमे तो बस एक चीज़ अच्छे से आती है, इस धरती पर रहो, प्रकृति द्वारा दी गई मुफ्त की सेवाओं का लाभ उठाओ, उन्हें अपनी सुविधा अनुसार बर्बाद करो और उनपे नये भवन  खड़े करों लेकिन उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित, संगृहित, संरक्षित मत करो। ये सारी चिंता सरकार की है ।हमे तो बस मुफ्त की मिल जाये तो घर भरना आता है।  और प्रकृति भी हमे बस देना जानती है, वो अपने भण्डार से देती रहती है लेकिन हम लेते नहीं बल्कि लूटते  हैं। और जिस तरह से हम लूट रहे है उस हिसाब से जल्द  ही भविष्य में प्रकृति का भण्डारण खाली होने वाला है और इस सबके बाद आप और हम ये जो अपनी जिंदिगी को आरामदेह बनाने में लगे हुए है वो नरक होने वाली है। मतलबआने वाले दिनों में हम सभी त्राहिमाम करने वाले है।

अगर एक दिन सोसाइटी में पानी बंद हो जाये तो आप क्या करते है? सिक्यूरिटी, मेंटेनेंस,जल विभाग सभी के फ़ोन की घंटी बजा देते है, अगर ये हमेशा के लिए बंद हो गई तो एक बार सोचिये जो आप करोड़ो रूपए खर्च कर के कंक्रीट के महल में ऐश की जिंदगी जी रहे है वो कैसी हो जाएगी और सिर्फ पानी बंद होने की वजह से आपकी महल की कीमत क्या रह जाएगी।

अगर आप कोई घर खरीदने जाते है और वहां पानी का कनेक्शन ना हो तो उसे आप कितने में लेंगे।। ये प्रश्न नहीं है ये मैं आने वाले समय की बात बता रहा हूँ , आने वाले समय  में यही होने वाला है जब जल नहीं रहेगा तो नल क्यों लगाये।

आज की पीढ़ी हर जगह एक विकल्प लेकर चलती है की ‘’ये नहीं तो ये सही’’ , पर मज़े की बात ये है की प्रकृति का कोई विकल्प नहीं है ।

आप साँसे लेते है। अगर वो बंद हो गई तो आपके पास कोई विकल्प नहीं है।

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